शाम तो खुशगवार है,
तन्हाई मेरे पास है ,
कही वो आज मिल जाती ,
जिसका मुझे वर्षो से इंतिजार है......
ये शाम और रंगीन होजाती ...
मद्धम- मद्धम चाँद की रोशनी में ,
जब उसको बाहों में जकर लेता .....
चाँद भी देखकर शर्माजाता ...................."
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