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Friday, March 26, 2010

"...कही वो आज मिल जाती........"

शाम तो खुशगवार है,
तन्हाई मेरे पास है ,
कही वो आज मिल जाती ,
जिसका मुझे वर्षो से इंतिजार है......
ये शाम और रंगीन होजाती ...
मद्धम- मद्धम चाँद की रोशनी में ,
जब उसको बाहों में जकर लेता .....
चाँद भी देखकर शर्माजाता ...................."

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